Thursday, October 25, 2012

Chapter-2


हनी श्याम को अपने पास आता देखकर खुदको तैयार कर लेता है।
हनी- अरे श्याम सर आइए! आइए! आप की ही कमी खल रही थी इतनी देर से. तो सुनाइए कुछ नई ताज़ा

श्याम- क्या यार! क्या नई ताज़ा सुनाएं? हाल तो बेहाल हो चुका है इस ड्राइवर की नौकरी में.. ना दिन का चैन औऱ ना रात का सुकून... ये भी कोई ज़िंदगी है.. साली कुत्ते की ज़िंदगी
हनी अपनी हंसी पर कंट्रोल करते हुए पूछता है- अरे सर। रोज़ नई नी लड़कियों के साथ आना जाना लगा रहता है... आपकी तो मौज ही मौज है।

श्याम- अरे। घण्टा मौज है... वो कहते हैं दूसरे की लुगाई और अपना छोरा सबको अच्छा लगता है बस वही बात है। अपनी हालत तो मिठआई की दुकान के बाहर बैठे कुत्ते जैसी है जो मिठाई देख तो सकता है मगर खआ नहीं सकता। मालिक रोज़ रोज़ नई छोरियों के साथ रात रंगीन करता है और अपन तो दिल पर पत्थर रखकर रात काट लेते हैं।

हनी- अच्छा! कभी तो ऐसा हुआ होगा ना कि आपके हाथ भी कोई तितली फसी हो?”

श्याम- नहीं यार... ये साली लड़कियां तो बस पैसे के पीछे भागती हैं और फिर हम ठहरे ड्राइवर... अपने पास इतने पैसे होते तो क्या यहां ड्राइवर की ही नौकरी कर रहे होते। साली छोट-छोटे कपड़े पहनकर अपना दिमाग मीटर डाउन कर जाती हैं। कभी–कभी तो... मगर फिर सोचता हूं छोड़ो यार ये बड़े लोगों के चोंचले हैं अपने को पड़ना ही नहीं इन चक्करों में.

हनी- अरे सरकार कभी तो कुछ हुआ होगा ना... या कभी बैटिंग नही मिली?”
श्याम- एक बार....
पनी- एक बार क्या? क्या हुआ था एक बार? बता दे.. बता दे.. दिल में कुछ मत रख.. हम सब तेरे ही यार हैं. .हां की बात कहीं नहीं निकलेगी बस हमारे बीच ही रहेगी. अब बता क्या हुआ था एक बार...

सब लोग श्याम को घुर रहे हैं।
श्याम- एक बार मालिक ने एक लड़की को घर बुलाया.. मगर उस दिन मालिक सेंचुरी बनाने से पहले ही बोल्ड हो गया और तितली शराब के नशे में मुझे घर छोड़ के आने के लिए कहने लगी
हनी-अच्छा फिर

श्याम- रात के कोई दो-ढ़ाई बजे होंगे और सुनसान रोड थी। ना बंदा ना बंदे की जात... कार थोड़ी ही आगे बढ़ी थी कि अचानक...
सब लोग एक साथ बोल उठे- अचानक क्या???”
श्याम- अचानक... (फ्लैश बैक में जाते हुए)

जंगल के बीच में एक सुनसान सड़क पर कार चल रही है। शांत माहौल है। कोई और कार आस-पास भी नही है। रात के अंधएरे में कार की रोशनी के अलावा कोई दूसरी रोशनी दूर-दूर तक नहीं है। गाड़ी की रफ्तार ऐसी मालूम पड़ती थी मानों किसी रेस में दौड़ रही हो। श्याम गाड़ी चला रहा है। पीछे की सीट पर एक खूबसूरत लड़की नीले रंग की हॉट पैंट और हरे रंग के टॉप में बैठी है। अचानक वो लड़की श्याम के कंधे पर हाथ रखती है। 

श्याम हनी और उसके दोस्तो को बताते हुए- मेरे कंधे पर उस लड़की ने हाछ रखा और मै पहले थोड़ा घबराया पर फिर हिम्मत कर मैने आखिरकार उससे पूछ ही लिया...

श्याम- क्या हुआ मैडम?”
लड़की- मुझे प्यास लगी है.. गाड़ी रोको।

श्याम ने गाड़ी रोक दी और डैशबोर्ड पर पड़ी पानी की बोतल पीछे लड़की को देने के लिए हांथ पीछे की तरफ किया। चूंकि वो खुद ड्राइवर की सीट पर था इसीलिए वो पीछे देख नहीं सकता था और बस उसने अपना हांथ पीछे कर दिया।

लड़की ने श्याम के हाथो से बोतल पकड़ी और साइड में रख दी और उसका हाथ पकड़कर उसका अंगूठा अपने होठों में दबा लिया।

हनी अपने एक दोस्त को अपनी बाहों में भर लेता है और एक्साइटिड होकर पूछता है- “आए हाए मेरे शेर...  चूसा-चुसंत्तम-चुस्वंत्तम.. फिर आगे क्या हुआ

श्याम- मेरी हालत तो बहुत खराब हो चुकी थी। आखिरकार मैं भी जवान हूं।  मेरा खून भी उबाल मारता है. आखिर कब तक बर्दाश्त करता। मैने सोचा बाद की बाद में देखी जाएगी। वैसे भी वो लड़की पूरी तरह से नशे में धुत्त थी तो सोचा आज चौक्के छक्के मार ही दिए जाएं। और ऐसा मौका बार-बार थोड़ी ना मिलता है। मैने फटाफट ड्राइविंग सीट से उछकर बैकसीट पर अपनी जगह बनाई और.

(फ्लैशबैक में)

लड़की श्याम की बाहों में है और श्याम तो इतना उत्सुक दिख रहा है जैसे किसी भिखारी को खज़ाना मिल गया हो। श्याम कभी उस लड़की के गालों पर किस करता तो कभी होंठों पर। 

सब लोग श्याम की बातें ऐसे गौर से सुन रहे थए मानो सत्यनारायण की कथा सुन रहे हो। सबके चेहरे पर एक अजीब का आवेग था। हनी ने अपने रजत को पीछे से कसके पकड़ा हुआ था।
श्याम- तो बस यही एक बार था जब इस कुत्ते को भी मिठाई खाने का मौका मिला...
हनी- यार! मेरे लिए भी कोई ड्राइवर की ही नौकरी ढूंढ़ ले अपनी तरह...
श्याम (पूरे स्टाइल के साथ)- चल तू भी क्या याद रखेगा। बात करता हूं तेरे लिए।

अचानक जिस लड़की को श्याम लेके आया था वो घर के बाहर आके कार के सामने खड़ी हो गई। श्याम कार की तरफ लपकता है। लड़की के लिए कार का दरवाज़ा खोलता है और खुद ड्राइविंग सीट पर बैठकर कार सूं से ले जाता है।
तीनो दोस्त अपनी जगह पर ही बैठे हैं और अभी भी श्याम की बातों में खोए हुए हैं।

रोहित- तुम्हे क्या लगता है ये श्याम जो उल्टी करके गया है क्या वो सब सच है? मै तो नही मानता कि साला दो कौड़ी का ड्राइवर... एक सेक्सी लड़की के साथ... ना
रजत- अबे घोड़ू। वो हम सबको चू...ज़ा समझके बोल-बच्चन दे रहा था। साले को पता नही है हम किस खेत की मूली हैं। क्यूं भाई हनी...
हनी- किस्मत मेरे दोस्त किस्मत... ये किस्मत भी साली बड़ी कुत्ती चीज़ है। जिसपे मेहरबान हो जाए उसी के व्यारे-न्यारे हैं। फिर क्या ड्राइवर और क्या मालिक।
हेमंत- तो तेरा मानना है कि अगर किसी लड़की को सचमुच जिस्म की प्यास लगी हो तो वो किसी ड्राइवर के साथ भी...
हनी- कर दी ना छोटी बात अनपढ़ो वाली। एक बात तो तुम लोग मानोगे ना कि हम तीनों में सबसे समझदार मैं ही हूं।

तीनो सिर हिलाके उसकी बात मानते हैं।
हनी- मैने लड़कियों को चुम लोगो से ज्यादा करीब से जाना है क्योंकि मैं 10वीं के बाद को-एड से पढ़ा हूं। तो बेटा अगर वो ड्राइवर है को क्या हुआ। सामान तो उसके पास भी वही है जो तेरे, मेरे या किसी और बंदे के पास है। जब खाने को बादाम ना मिले तो मांगफली से भी काम चलाना पड़ता है।
इतना बोलकर हनी ने एक मूंगफली का दाना हवा में उछाला और मुंह से लपक लिया। 

रोहित- चल यार अपने को क्या करना... मजे लिए तो उसने लिए. ठुकाई हुई तो उस लड़की की हुई। हम तुम क्यूं यहां पोस्ट-मार्टम करने में लगे हैं। मैं तो चला अपने घर. 11 जब गए हैं

रजत और हेमंत भी रोहित की बात से सहमत हो गए। दोनो ने कहा कि अब भी घर नही पहुंचे तो डैडी की मार खानी पड़ेगी।
हनी- चलो फिर मैं भी चलता हूं। गुड नाइट

हनी के अलावा बाकी तीनो दोस्त एक साथ एक तरफ चलने लगे। हनी का घर दूसरी डायरेक्शन में था तो वो अकेला ही निकल पड़ा। 

मूंगफली के आखरी दो दानो को भी बीच में से तोड़कर चार दाने बनाकर एक-एक दाने को हवा में उछालता और मुंह से लपकता हुआ हनी सुनसान सड़क पर चलने लगा।  हल्के-हल्के से कोई गाना भी गुनगुना रहा है।

पौने 12 बजे हम तो घर से चले... वट्स गोइंग ऑन.. म्मममम... सो गया ये जहां.. सो गया आसमां...
अभी हनी थोड़ी दूर ही गया था कि अचानक उसे एक लड़की दिखाई दी जोकि इतनी रात गए सड़क पर अकेली चले जा रही थी। लड़की यही कोई 100 मीटर आगे होगी। हनी की आंखों में एख चमक आ गई। हनी तेज़ कदमों के साथ लड़की का पीछा करने लगता है।


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