चांदनी चौक की गलियां..
भीड़भाड़... लोटस टेंपल की शांति, पराठे वाली गली का ज़ायका, निज़ामुद्दीन औलिया
की रुहानियत, दिल्ली 6 की बेबाकियां। दिल्ली... दिलवालों की दिल्ली... चाहे
भीड़भाड़ वाली चांदनी चौक की गलियां हों या सरपट दौड़ती मेट्रो ट्रेन, दिल्ली का
अपना एक अलग अंदाज़ है. यहां ज़िंदगी मुंबई की तरह सिर्फ भागती नहीं है बल्कि
दिल्ली में ज़िंदगी को पूरी ज़िंदादिली से जिया जाता है.
प्रोज़िडेंट हाउस का
विशाल प्रांगण, पार्लियामेंट स्ट्रीट की बादशाहत, बुद्धा गार्डन की मस्तियां, युगल
जोड़ों की गुस्ताखियां, रात की अंधेरी गलियां, खूबसरती को जीवंत कर उठती दिल्ली..
भारत की राजधानी दिल्ली मगर पिछले कुछ दिनों में “दि
रेप कैपिटल ऑफ इंडिया” का
खिताब भी जीत चुकी है दिल्ली। अक्सर अखबार के फ्रंट पेज़ से लेकर लास्ट पेज़ तक
दर्जनों खबरें आपको बलात्कार से जुड़ी मिल जाएंगी। चलिए छोड़िए।
रात का वक्त है और एक
जवान-ओ-खूबसूरत नौजवान सड़क पर चला आ रहा है। एक मूंगफली वाले की रेहड़ी से चलते
चलते कुछ एक दाने मुंगफली के उठा लेता और अपनी ही मस्ती में चलते-चलते खाता जा रहा
है। ये है हनी। दिल्ली के खानपुर का रहने वाला हनी। बिल्कुल पर्फेक्ट डेलिआइट है
ये। पालिका बाज़ार से 200 की शर्ट, 600 की जींस, 100 का गौगल, 90 का पर्फ्यूम लगाए
खुद को शाहरुख खान से कम नहीं समझता ये। मस्तमौला... यारों का यार.. कुछ बड़ा करने
की ख्वाहिश मगर फिल्हाल बेरोज़गार...
हनी चलते चलते अपने
दोस्तों के एक ग्रुप के पास पहुंचता है.. रोहित, हेमंत और रजत उसी के बचपन के
दोस्त हैं। रोहित मेरठ का है मगर रहता दिल्ली में है. हेमंत पंजाबी है और रजत ठेठ
हरयाणवी।
हनी हैरत से पूछता है- “अबे बहन के टकों किसकी मां मर गई है? अरे
सालों इतना सन्नाटा क्यूं है भाई”
रोहित- “अबे चूचड़ सिंह चीचड़.. तेरा ही इंतज़ार था”
हनी- “मेरा इंतज़ार??? मैं
क्या यहां आके मुजरा करने वाला हूं जो मेरा इंतज़ार कर रहा था”
रजत- “तू मुजरा नही कर सकता मगर हमें मुजरा दिखाने तो ले चल सकता है ना। मेरा मतलब
किसी डिस्क चलते हैं यार। बड़ा मन है। मजे करेंगे।”
हनी (जगह बनाके बैठते
हुए)- “घण्टा डिस्क! यहां साले मूंगफली तक तो हैं नहीं जेब में औऱ तू बात करता है डिस्क जाने की”
हेमंत- “ अबे जेब में हाथ डाल के देख.. दो तो निकल ही आएंगी”
हनी- “ले साले तू खा ले। दो-चार दाने मूंगफली के दाने उड़ा के लाया था वो भी तू ही
ठूंस ले।”
रोहित- “तो आज कोई नौकरी मिली??”
हनी- “साले अब तू बाप बनने की कोशिश मत कर. बाप की चिक-चिक से बचके यहां आता हूं और
अब तू भी यहीं पे... मैने साली पढ़ाई भी इसीलिए छोड़ दी कि बाप साला बोलता था
पढ़ाई करो बेटा, पढ़ाई साथ रहती है पैसा नही... घण्टा.. गजनी नही देखी बाप ने
मेरे। आखिर में पैसा काम आया ना। ब्लडी शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस.”
हल्की सी चुप्पी छा गई
और हनी थोड़ा सा शांत होकर यूं ही अपने आप से कुछ कहता है-
“सुबह-ओ-शाम मुकद्दर जीतने की जुस्त-ओ-जूं में रहता हूं,
के इसी सनक में रोज़
मुकद्दर के तन्ज़ सहता हूं”
हेमंत- “नौकरी छोड़ यार साली कोई लड़की भी तो नहीं पट रही जो अपनी प्यास शांत हो। ”
हनी- “लोलीपोप चूस ले साले। प्यास शांत करनी है। ठण्डा पी अगर प्यास शांत करनी हो तो”
रजत- “अबे उसे क्यूं बोल रहा है। तेरा मन नही है क्या बोटिंग करने का? एक तो जवानी ऊपर से ये काली रात। तुम्हे पता है लिनार्डियो दा विंची का कहना
है love shows itself more in adversity than in prosperity; as light does,
which shines most where the place is darkest”
हनी- “अगर लिनार्डियो दा विंची की जगह लिनार्डियो का केपरियो होता तो साला डारेक्ट ये
कहता love shows Itself more in DARK than LIGHT”
रजत- “ओहो अंग्रेजी। साले बस एक यही बात तेरी मस्त है। हमारे साथ सरकारी स्कूल से 10वीं पूरी की मगर इंग्लिश में तो तू ओबामा को पानी पिलवा दे।”
हनी- “सक्सेस के लिए अंग्रेजी आनी बहुत ज़रुरी है पढ़ाई नही। मैं जो ये हर हफ्ते
इंगिल्श फिल्म देखने जाता हूं तो सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए नही बल्की फ्लूएंट
इंग्लिश बोलने के लिए। अब कौन साला जाए और ई-लिंगुआ में पैसे फूंके। और रही बात
बंदी की तो सालों मेरा नाम हनी है और मैं तो हनीमून मना के रहूंगा। देख लेना। तुम
बस अपनी सोचो”
रोहित- “यार तू कोई मस्त सी लड़की देखके हमें पटवा क्यों नहीं लेता।”
हनी- मैं क्या दलाल लग
रहा हूं जो लड़की पटवाता फिरूं। खुद की बम मनें अगर दम है तो अपने आप पटाओ लड़की।
जैसे मैं पटाता हूं”
रजत- “बात तो तेरी ठीक है वो कोमल याद है ना”
हनी- “उसके बारे में कोई बात नहीं”
अचानक रात के अंधेरो
चीरती हुई एक तेज रोशनी आती है और ठईक इन लोगों के सामने आके रुकती है। कार से
मिनी स्कर्ट पहने हुए एक लड़की निकलती है। लड़की ने ब्लैक कलर की ड्रैस पहनी है और
ऐसा मालूम पड़ता है कि मानो उसने अपनी क्लीवेज का पर्दर्शन करने के लिए ही उस
ड्रेस को पहना हो।
हनी और उसके दोस्त उस
लड़की को मिठाई की दुकान के बाहर बैठे कुत्तों की तरह देख रहे हैं। लड़की सामने
वाले घर की ओर बढ़ती है और फिर उसमें एंटर कर जाती है।
रोहित- “ओए-होए-होए-होए!!! क्या
टोट्टा माल है यार। मां कसम इसके लिए धारा 376 भी झेल जाऊ”
रजत- “भाईसाहब। खतरनाक पीस है”
रोहित- “खतरनाक नही, खतरनास पीस है
रजत- “वैसे एक बात बता . साली लड़कियां छपाने के लिए कपड़े पहनती हैं या दिखाने कि
लिए? सबकुछ तो बाहर दिख रहा है।”
रोहित- “यही तो कला है, बाकी सब विज्ञान है. ये साली दिखआती भी हैं और छुपाती भी है।
ताकी लड़कों को उकसा भी सकें और जब सबकुछ हो जाए तो इल्ज़ाम भी लड़कों पर ही आए”
हेमंत- “काश एक बार मिल जाए.. किसी कोने में। तो पूछेंगे की गोल-चौक की गोलाई कितनी
है। वैसे यार साइज़ क्या होगा?”
रोहित- “भाईसाहब मुझे मदर-डेयरी लग रही है. 36 है लगा ले शर्त”
रजत- “कप लगाए होंगे”
हेमंत- “तुम लोग सालों कप-प्लेट में ही उलझे रहोगे ज़िंदगी भर और साले हनी तूझे क्या
हो गया। मन भावनाएं समाप्त हो गई हैं क्या? य़ा
ब्रह्मचारी हो गया है?”
हेमंत- “रुक ना झोपड़ी के। मैं सोच रहा था कि रोज़-रोज़ नई लडकियां इस घर में आती है।
आखिर ये माझरा क्या है?
वो देखो श्याम इसी तरफ आ रहा है। तुम लोग चुप रहना, मुझे बात करने देना”
श्याम उस कार का
ड्राइवर है जिसमें से वो सेक्सी लड़की निकलकर सामने वाले घर में गई थई। श्याम की इन
लोगों से बोलचाल भी है क्यूंकि अक्सर वो यहां आके बैठतें हैं औप श्याम भी सिगरेट
पीने के बहाने इनके साथ टाइम पास कर लेता है।
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